संस्कार
संस्कार क्या है ?
किसी के कार्य में अपना सहयोग देना संस्कार का एक रूप है ।
किसी को तंग न करना संस्कार है किसी के तकलीफ में साथ देना संस्कार है किसी के विरुद्ध ना जाना संस्कार है
संस्कार को परिभाषित किया जा सकता है ।
जिस प्रकार मनुष्य अपने जीवन में सुखी व्यक्ति का साथ देता है और दुख मे साया बन खड़ा रहता है उसी प्रकार
जानवरों में भी ये गुण पाए जाते है उनमे भी संस्कार होता है ये प्रकृति द्वारा दिया है जो हमे अनुभव कराता है की हम
सब एक बराबर है
बात संस्कार पर आकर रुकती है ये क्या है ।
इसका अर्थ ये है की हम अपनी बातों विचारों या कामों को किसी से जबर्जस्ती नहीं करा सकते है ये हमारे संस्कार है
जो हमे औरों से अलग बनाती है जिसने हमारी अलग पहचान होती है संस्कार के बहुत से अर्थ है जैसे की मान
लीजिए
की आप कोई आमिर व्यक्ति से मिल रहे है जो संस्कार की परिभाषा नहीं जानता जो आपसे अच्छे से पेश नहीं
आता है परंतु आप उसे अपने व्यवहार से उसे संस्कार का मतलब बताते है जिससे उसे आपसे जलन होने लगती है
उसे ये लगेगा की मई जो की एक आमिर व्यक्ति है वो आज इस छोटे से काम करने वाले से संस्कार की परिभाषा
सीखेगा ।
असंभव
उसे क्रोध आएगा आपके ऊपर वो अपक्कों भला बुरा कहेगा ।
लेकिन फिर भी आप उसकी बातों को सुनेंगे और उसे अर्थ बताएंगे ये संस्कार का परिचय देता है ।


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