भारतवंशी
जब आ ही चुके रणक्षेत्र मे तो
तब पीठ दिखाकर जाना क्या ?
जब उठा लिए है अस्त्र - शस्त्र
फिर बार - बार पछताना क्या ?
जीतूँगा या मर जाऊंगा ,
अब नाम अमर कर जाऊंगा |
हूँ वीर सपूत मैं माँ तेरा ,
ऐसा करतब दिखलाऊँगा |
दुश्मन कितना ही हो अपराजेय
उसको भी मार भगाऊँगा |
धरती पर लोग करोड़ों है
पर कोई नहीं अपने जैसा
नितरोज नया इतिहास रचे
ये बात नहीं सपने जैसा
मैं भारतवंशी हूँ उद्घोष
यह बार - बार अठाऊँगा



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