मेरी जिंदगी

 

जिंदगी के कुछ पहलू

         मेरे जीवन मे आज ऐसा समय आया है जो कि मेरे लिए सबसे

 कठिन है मुझे बहुत बुरा लग रहा है मै आज खुश भी हूँ और दुखी भी |

 खुश इसलिए कि आज मेरा का द्वादस परिणाम आने वाला है

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 कुछ समय पहले कि बात

          मै द्वादस कि कक्षा में था बोर्ड के पेपर से कुछ समय पहले कि

 ही बात है मेरे दोनों भाइयों को डेंगू हो गया दिसम्बर का महिना था मै दो

 दिन तक अस्पताल मे था तीसरे दिन मुझे भी हल्की ठंड महसूस हुई | तब

 मेरे पापा हमसे ३५० कि० मी० कि दूरी पर थे | जो वहा से निकल चुके थे |

 जब उन्होंने भाइयों कि हालत सुनी तो वो वह सारे काम छोड़ के हमारे पास

 भागते हुए निकले | जब उन्होंने मेरी हालत देखी तो उन्होंने मुझे भी

 ऐड्मिट कर दिया उन्हे सायद पता था कि मुझे भी डेंगू ही है जो कि सच

 था मेरे लक्षण उस रोग को चिन्हित कर रहे थे | हम तीनो सिटी अस्पताल

 मे ऐड्मिट थे उस समय मैंने अपने पापा को टूटते हुए देखा उनके अंदर कि

 हिम्मत टूट चुकी थी एक तरफ हम तीनों डेंगू से पीड़ित जीवन और मृत्यु

 से संघर्ष कर रहे थे वही हमारे पापा पैसे और इस कठिन परिस्थि से जंग

 लड़ रहे थे मैंने देखा मेरे पापा कि हालत सही नहीं थी वो जिस दिन आए

 उन्होंने थोड़े से समय के लिए भी आराम नही किया | वो थके हारे हमारे

 सेवा मे लगे रहे | वही माँ रोज हम लोगों के लिए खाना बना कर अस्पताल

 ले आती थी | माँ को तो आप लोग जानते ही हो क्या हालत हो गई थी

 तीन बेटे और तीनो के तीनों अस्पताल में क्या बीत रही होगी माँ पर |

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